मध्यप्रदेश में वनसंपत्ती(Forest wealth in Madhya Pradesh) - GK Study

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मध्यप्रदेश में वनसंपत्ती(Forest wealth in Madhya Pradesh)

सागौन वनसागौन वन काली मिट्टी  वाले क्षेत्र में पाए जाते हैं सागौन वनों के लिए 75 से 125 सेमी वर्षा पर्याप्त होती है सागौन की लकड़ी में एक क्रेन होती है जिसके कारण सागौन की लकड़ी से बने सामान में सुंदरता आ जाती है होशंगाबाद के बोरी घाटी में सर्वाधिक बहुतायत में सागौन वन पाए जाते हैं

सालवनमध्य प्रदेश के लाल और पीली मिट्टी वाले क्षेत्र में साल बन पाए जाते हैं साल वनों के लिए औसत 12.5 सेमी वर्षा वाला क्षेत्र चाहिए यह वन अधिक घने होते हैं साल की लकड़ी का उपयोग स्लीपर बनाने में किया जाता है

बांस बांसबांस 75 सेमी या अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में पाया जाता है मध्यप्रदेश में dendrocalamus strictus प्रकार  का बांस पाया जाता है मध्य प्रदेश में 5000000 नल  का भंडार है बांस की लुगदी से कागज का निर्माण भी किया जाता है ओरिएंट पेपर मिल अमलाई और नेपानगर अखबारी कागज के कारखानों में बांस का प्रयोग बहुतायत से किया जा रहा है

खैर वृक्षखैर वृक्ष का उपयोग कत्था बनाने में किया जाता है पाचन तंत्र की गड़बड़ियों में खैर के वृक्ष उपयोगी हैं जबलपुर, सागर , दमोह , उमरिया और होशंगाबाद में खैर के वृक्ष पाए जाते हैं मध्यप्रदेश में शिवपुरी तथा बानमोर में कत्था बनाने का एकएक कारखाना है इन कारखानों को शिवपुरी श्योपुर तथा गुना के वनों से खैर की लकड़ी प्राप्त होती है

लाखमध्यप्रदेश में प्रतिवर्ष 40000 टन लाख का उत्पादन होता है लाख मध्यप्रदेश में मंडला , जबलपुर , सिवनी , शहडोल तथा होशंगाबाद के वनों में पाया जाता है मध्यप्रदेश में उमरिया में लाख बनाने का सरकारी कारखाना है इसके अतिरिक्त भी अन्य कारखाने हैं जिनमें  सीड , लाख और सेलाख बनता है

 हर्रामध्यप्रदेश में हर्रा निकालने के अनेक कारखाने हैं हर्रा का प्रयोग चर्म शोधन में किया जाता है इस से चमड़ा साफ करने का एक लोशन बनाया जाता है  हर्रा में 35 से 40% तक चर्म शोधन तत्व होते हैं हर्रा  मुख्यता छिंदवाड़ा , बालाघाट , मंडला ,   श्योपुर , शहडोल के वनों से प्राप्त होता है

तेंदूपत्तातेंदूपत्ते से बीड़ी बनाने का उद्योग मुख्यतः सागर , जबलपुर , शहडोल एवं सीधी , दमोह , गुना, रीवा में संकेंद्रीकृत है देश के बीड़ी पत्ता का उत्पादन का लगभग 60% मध्य प्रदेश में प्राप्त होता है तेंदूपत्ता व्यवसाय में राज्य के 1000000 आदिवासी मजदूर कार्यरत हैं 1988 से मध्य प्रदेश में तेंदूपत्ता के संदर्भ में नवीन नीति अपनाई गई जिसमें बिचौलियों के माध्यम से तेंदूपत्ता एवं अन्य वनोपज संग्रहण की प्रथा समाप्त कर दी गई

भीलालाभीलाला स्याही और पेंट बनाने के काम में आता है छिंदवाड़ा में इसका एक कारखाना है

गोंद गोंद साधारणतया बबूल , धावड़ा , सैनीयल आदि वृक्षों से प्राप्त होता है खाने के अतिरिक्त गोंद का प्रयोग पेंट उद्योग पेपर प्रिंटिंग दवा उद्योग कॉस्मेटिक आदि में होता है

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