Important facts related to biology in Hindi PART-12 - GK Study

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Important facts related to biology in Hindi PART-12

 जीव विज्ञानं से सम्बंधित महत्पूर्व तथ्य हिंदी  में NTPC , RAILWAY GROUP-D , SSC , IBPS , STATE PSC के लिए उपयोगी पार्ट-12 





01   *एक ग्राम बसा से 9.3 किलो कैलोरी ऊर्जा उत्पन्न होती है |

02   *शरीर मे जल का भार 65 – 80% होता है |

03   *हड्डियों एवं दातों को स्वस्थ रखने में सहायक अकार्बनिक पदार्थ फ्लुओरीन होता है |

04   *मूत्र का रंग पीला यूरोक्रोम के कारण होता है |

05   *थाइराइड ग्रंथि गले में पायी जाती है |


06   *सभी मानसिक क्रियाओं का नियंत्रण प्रमस्तिष्क (मस्तिष्क के अगले भाग) में होता है |

07   *सामान्य ऐच्छिक क्रियाओं जैसे- चलना-फिरना, बोलना का नियंत्रण अनुमस्तिष्क (मस्तिष्क के पिछले भाग) मे होता है |

08   *मनुष्य के मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग प्रमस्तिष्क होता है |

09   *शरीर मे रक्त परिभ्रमण मे 23 सेकेण्ड का समय लगता है |

10   *तत्काल ऊर्जा प्राप्त करने के लिए कार्बोहाइड्रेट लिया जाता है |


11   *केचुए में 4 जोडी हृदय होते हैं | इसके जीव द्रव्य मे हीमोग्लोबिन का विलय होता है |

12   *रक्त एक सरल संयोजी ऊतक है |

13   *रूधिर का कार्य आक्सीजन को फेफड़ों से शरीर के सभी भागों में पहुंचाना तथा कार्बन डाई आक्साइड को शरीर के भागों से फेफड़े तक लाना है |

14   *रक्त एक क्षारीय विलयन है, इसका PH मान 7.4 होता है |

15   *मानव शरीर में रक्त की मात्रा शरीर के भार का लगभग 7 से 8% तक होती है|


16   *महिलाओं मे पुरूषों की तुलना मे आधा लीटर कम रक्त होता है |

17   *पचे हुए भोजन एवं हार्मोन का शरीर में संवहन प्लाज्मा के द्वारा होता है |

18   *लाल रक्त कण (RBC) का जीवन काल 100 से 120 दिन का होता है | इसमें हीमोग्लोविन होता है जिसके कारण रक्त का रंग लाल होता है

19   *हीमोग्लोबिन मे पाया जाने वाला लौह यौगिक हीमैटिन है |

20   *RBC का मुख्य कार्य शरीर की हर कोशिका मे आक्सीजन पहुंचाना तथा कार्बन डाई आक्साइड बाहर लाना है |


21   *हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने पर रक्त क्षीणता (एनीमिया) नामक रोग हो जाता है |

22   *रक्त शरीर के ताप का नियंत्रण तथा शरीर को रोगों से रक्षा करने का कार्य करता है |

23   *रक्त का थक्का बनने के लिए अनिवार्य प्रोटीन फाइब्रिनोजन है |

24   *श्वेत रूधिर कणिकाएं हानिकारक जीवाणुओं एवं विषाणुओं का भक्षण करती हैं

25   *रूधिर की प्लेट्लेट्स कणिकाएं स्थान या घाव पर रूधिर का थक्का बनाकर उसकी रक्षा करती हैं |


26   *रूधिर शरीर मे जल संतुलन को बनाये रखता है |

27   *रक्त समूह की खोज कार्ल लैंड स्टीनर ने किया था | इसके लिए 1930 ई. में उन्हे नोवेल पुरस्कार मिला |

28   *मनुष्य के रक्तों की भिन्नता का मुख्य कारण लाल रक्त कण (RBC) मे पायी जाने वाली ग्लाइको प्रोटीन है, जिसे एण्टीजन कहते हैं

29   *जिसमे दोनों (A तथा B) मे से कोई एण्टीजन नहीं होता है, वह रूधिर वर्ग O कहलाता है

30   *रक्त समूह O को सर्वदाता रक्त समूह कहते हैं |


31   *रक्त वर्ग A B को सर्वग्रहता रक्त समूह कहते हैं, क्योंकि इसमे कोई एण्टीबाडी नही होता है |

32   *इंसुलिन ग्लुकोज से ग्लाइकोजिन बनाने की क्रिया को नियंत्रित करता है |

33   *इंसुलिन के अल्प स्रवण से मधुमेह नामक रोग होता है |

34   *रूधिर मे ग्लूकोज की मात्रा बढ़ना मधुमेह कहलाता है |

35   *शरीर से हृदय की ओर रक्त ले जाने वाली रक्त वाहिनी को ‘शिरा’ कहते हैं |


36   *शिरा मे अशुद्ध रक्त अर्थात कार्बन डाई आक्साइड युक्त रक्त होता है | इसका अपवाद पल्मोरीन शिरा है |

37   *पल्मोरीन शिरा फेफडे से बायें अलिंद मे रक्त को ले जाती है , इसमे शुद्ध रक्त होता हैं |

38   *हृदय से शरीर की ओर रक्त ले जाने वाली रक्त वाहिनी को धमनी कहते हैं, धमनी मे शुद्ध रक्त अर्थात आक्सीजन युक्त रक्त होता है | इसका अपवाद पल्मोनरी धमनी है, पल्मोनरी धमनी दाहिने निलय से फेफड़े मे रक्त पहुंचाती है , इसमे अशुद्ध रक्त होता है |

39   *हृदय के दायें भाग मे अशुद्ध रक्त तथा बायें भाग मे शुद्ध रक्त होता है |

40   *शरीर से अशुद्ध रक्त दाया अलिंद से दाया निलय फिर फेफडे मे जाता है |


41   *शुद्ध रक्त फेफडे से बायां अलिंद,बायां अलिंद से बायां निलय फिर शरीर मे प्रवेश करता है |

42   *हृदय की मांसपेशियों को रक्त पहुंचाने वाली वाहिनी को कोरोनरी धमनी कहते हैं | इसी मे किसी प्रकार की रूकावट होने पर हृदयाघात होता है |

43   *सामान्य अवस्था मे मनुष्य का हृदय एक मिनट मे 72 बार (भ्रूण अवस्था मे 150 बार) धड़कता है तथा एक धड़कन मे लगभग 70 मि.ली. रक्त पम्प करता है |

44   *रूधिर मे उपस्थित कार्बन डाई आक्साइड रूधिर के PH को कम करके हृदय की गति को बढाता है, अर्थात अम्लीयता हृदय की गति को बढाती है तथा क्षारीयता हृदय की गति को कम करती है |

45   *वृक्कों को रूधिर की आपूर्ति अन्य अंगों की तुलना मे बहुत अधिक होती है |


46   *वृक्क का मुख्य कार्य उत्सर्जन करना होता है |

47   *परजीवी जंतुओं को आहार पचाने की आवश्यकता नही होती क्योंकि वे पचा-पचाया भोजन अपने पोषक की आतों या अन्य स्थानों मे रहकर शोषित करते हैं | इस प्रकार के परजीवी का उदाहरण फीताकृमि है |

48   *विटामिन की खोज फंक ने किया |

49   *विटामिन : विटामिंस जटिल कार्बनिक पदार्थ होते हैं | इनकी थोडी सी मात्रा शरीर की उपापचयी क्रियाओं को नियंत्रित करती है |

50   *जल मे घुलनशील विटामिंस : B तथा C


51   *वसा मे घुलनशील विटामिंस : A, D, E, K

52   *विटामिनों का संश्लेषण हमारे शरीर की कोशिकाओं द्वारा नहीं हो सकता, इसकी पूर्ति विटामिंस युक्त भोजन से होती है | विटामिन D तथा K का संश्लेषण हमारे शरीर द्वारा होता है |

53   *फोलिक एसिड की कमी से एनीमिया रोग हो जाता है |

54   *घेंघा रोग भोजन मे आयोडीन की कमी से होता है | इस रोग मे थाइरायड ग्रंथि के आकार मे वृद्धि हो जाती है |

55   *कार्टेक्स के विकृत हो जाने पर उपापचयी प्रक्रमों में गड़बड़ी उत्पन्न हो जाती है | इस रोग को एडीसन रोग कहते हैं |


56   *कार्बोहाइड्रेट : कार्बन, हाइड्रोजन एवं आक्सीजन के 1:2:1 के अनुपात से मिलकर बने कार्बनिक पदार्थ कार्बोहाइड्रेट कहलाते हैं | शरीर की ऊर्जा की आवश्यकता की 50 से 75% मात्रा की पूर्ति इन्ही पदार्थों द्वारा की जाती है |

57   *एक ग्राम ग्लूकोज के पूर्ण आक्सीकरण से 4.2 किलो कैलोरी ऊर्जा उत्पन्न होती है |

58   *प्रोटीन : प्रोटीन शारीरिक वृद्धि के लिए आवश्यक है | इसकी कमी से शारीरिक विकास रूक जाता है | बच्चों में इसकी कमी से क्वाशियोर्कर एवं मरस्मस रोग हो जाता है |

59   *क्वाशियोर्कर रोग में बच्चों का हाथ-पांव दुबला-पतला हो जाता है एवं पेट बाहर की ओर निकल जाता है |

60   *मरस्मस रोग मे बच्चों की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं |


61   *वसा : वसा सामान्यतया 20’C पर ठोस अवस्था मे होते हैं, परंतु यदि वे इस ताप पर द्रव अवस्था में हो तो उन्हे तेल कहते हैं |

62   *शरीर मे वसा का संश्लेषण माइटोकांड्रिया मे होता है |

63   *वसा शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है तथा शरीर के विभिन्न अंगों को चोटों से बचाती है | वसा की कमी से त्वचा रूखी हो जाती है, वजन मे कमी आती है एवं शरीर का विकास रूक जाता है |

64   *वसा की अधिकता से शरीर स्थूल हो जाता है, हृदय की बीमारी हो जाता है एवं रक्त चाप बढ़ जाता है |

65   *कैल्सियम : यह विटामिन के साथ मिलकर हड्डियों एवं दांतों को मजबूती प्रदान करता है |


66   *फास्फोरस : यह कैल्सियम से सम्बद्ध होकर दातों तथा हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है |

67   *लौह : लोहा लाल रूधिर कणिकाओं में हीमोग्लोविन के बनने के लिए तथा ऊतक मे आक्सीकरण के लिए आवश्यक है |

68   *आयोडीन : यह थाइराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित हार्मोन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है |

69   *गर्भवती स्त्रीयों के लिए प्राय: कैल्शियम और आयरन की आवश्यकता होती है

70   *दूध को संतुलित आहार नही माना जाता क्योंकि इसमे आयरन एवं विटामिन सी की कमी होती है |


71   *खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए सोडियम बेंजोएट का प्रयोग किया जाता है |

72   *लार मे मुख्य रूप से पाया जाने वाला एंजाइम टायलिन है |

73   *लार का PH मान 6.5 होता है तथा प्रकृति अम्लीय होती है |

74   *दूध को फाड़ने या थक्का बनाने का कार्य रेनिन करता है |

75   *रूधिर मे शर्करा की मात्रा को इंसुलिन नियंत्रित करता है |


76   *मानव शरीर मे सामान्य रक्त दाब 120/80 होता है |

77   *WBC का मुख्य कार्य शरीर को रोगों के संक्रमण से बचाना होता है |

78   *RBC का मुख्य कार्य शरीर की हर कोशिका मे आक्सीजन को पहुंचाना होता है |

79   *WBC का निर्माण तथा RBC का विनाश प्लीहा मे होता है |

80   *लाल रक्त कणिकाओं का कब्रगाह प्लीहा को कहते हैं |


81   *रक्त के शुद्धिकरण का कार्य फेफड़ा करता है |

82   *शुद्ध जल का PH मान 7.0 तथा समुद्री जल का PH मान 8.4 और दूध का PH मान 6.4 होता है |

83   *बैक्टिरिया की खोज ल्यूवेन हाक ने की |

84   *शरीर का सबसे कठोर तत्व एनामिल (दातों के ऊपर) होता है |

85   *आखों मे बाहर से पड़ने वाले प्रकाश को आइरिस नियंत्रित करता है |


86   *शरीर मे कोलोस्ट्राल की अधिकता के कारण हृदयाघात होता है |

87   *इंसुलिन की कमी से डायबिटिज रोग होता है |

88   *हल्का कार्य करने वाले पुरूष को 2000 कैलोरी, 8 घण्टा कार्य करने वाले पुरूष को 3000 कैलोरी एवं कठिन परिश्रम करने वाले पुरूष को 3600 कैलोरी भोजन की आवश्यकता होती है |

89   *विषाणु (Virus) अथवा परजीवि (Protozoa) को सजीव एवं निर्जिव के बीच की कडी कहते है | विषाणु को महीन चूर्ण के रूप मे शीशी मे बंद करके असीमित समय तक रखा जा सकता है |

90   *विषाणु निर्जीव होते हैं | विषाणु कोशिकाओं मे द्विगुणन करते हैं |


91   *विषाणु का संघटन RNA अथवा DNA तथा प्रोटीन से होता है |

92   *स्वतंत्र विषाणु पोषण, श्वसन, वृद्धि एवं विखण्डन नही करते हैं |

93   *विषाणुओं द्वारा उत्पन्न होने वाले कुछ रोग हैं- जुकाम, इंफ्लुएंजा, खसरा, पोलियो, चेचक, पीलिया, एड्स, रेबीज, मलेरिया, पायरिया, पेचिश, काला-जार आदि |

94   *तम्बाकू का मोजैक रोग विषाणु द्वारा होता है |

95   *अब तक ज्ञात एक-कोशकीय जीवधारीयों मे जीवाणु (Bacteria) सरलतम जीवधारी है |


96   *जैव पदार्थों का सड़ना तथा क्षय होना,प्रकृति मे जीवाणुओं का महत्वपूर्ण कार्य है |

97   *कुछ विशेष प्रकार के जीवाणु दलहनी पौधों की जड़ों मे स्थित छोटी-छोटी गाठों मे पाये जाते हैं , ये जीवाणु वायु से नाइट्रोजन ले कर उसे जल मे विलेय नाइट्रेट लवणों मे परिवर्तित कर देते हैं |

98   *घरों मे दूध मे उपस्थित शर्करा को कैक्टिन एसिड मे बदल कर दही बनाने के लिए भी जीवाणुओं का उपयोग किया जाता है |

99   *दूध का फटना, मक्खन से दुर्गंध आना, डिबा मे बंद या खुली सामाग्री का सड़ना, अचार, मुरब्बा आदि का खराब होना आदि जीवाणु जनित क्रियायें होती हैं

100   *नीबू का कैंकर रोग, आलू का स्कैब, सेब एवं नाशपाती की अंगमारी, तम्बाकू का विल्ट आदि जीवाणु जनित रोग हैं
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