इल्बारी वंश से सम्बंधित महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान हिंदी में सभी प्रतोयोगी परीक्षाओ लिए उपयोगी (Important general knowledge related to Ilbari dynasty useful for all competitive examinations in Hindi) - GK Study

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इल्बारी वंश से सम्बंधित महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान हिंदी में सभी प्रतोयोगी परीक्षाओ लिए उपयोगी (Important general knowledge related to Ilbari dynasty useful for all competitive examinations in Hindi)

इल्बारी वंश से सम्बंधित महत्वपूर्ण सामान्य ज्ञान हिंदी में सभी प्रतोयोगी परीक्षाओ   लिए उपयोगी(Important general knowledge related to Ilbari dynasty useful for all competitive examinations in Hindi)



इल्बारी वंश

इल्बारी वंश की स्थापना इल्तुतमिश (1210- 1236 ई.) ने की थी, जो एक इल्बारी तुर्क था। खोखरों के विरुद्ध इल्तुतमिश की कार्य कुशलता से प्रभावित होकर मुहम्मद ग़ोरी ने उसे “अमीरूल उमर” नामक महत्त्वपूर्ण पद प्रदान किया था।

अकस्मात् मुत्यु के कारण कुतुबद्दीन ऐबक अपने किसी उत्तराधिकारी का चुनाव नहीं कर सका था। अतः लाहौर के तुर्क अधिकारियों ने कुतुबद्दीन ऐबक के विवादित पुत्र आरामशाह, जिसे इतिहासकार नहीं मानते, को लाहौर की गद्दी पर बैठाया।

दिल्ली के तुर्क सरदारों एवं नागरिकों के विरोध के फलस्वरूप कुतुबद्दीन ऐबक के दामाद इल्तुतमिश, जो उस समय बदायूँ का सूबेदार था, को दिल्ली आमंत्रित कर राज्यसिंहासन पर बैठाया गया।

राजगद्दी पर अधिकार को लेकर आरामशाह एवं इल्तुतमिश के बीच दिल्ली के निकट ‘जड़’ नामक स्थान पर संघर्ष हुआ, जिसमें आरामशाह को बन्दी बनाया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गयी।

ऐबक वंश के आरामशाह की मृत्यु के बाद दिल्ली सल्तनत में अब ‘इल्बारी वंश’ का शासन प्रारम्भ हुआ।
“”निज़ामशाही वंश””

निज़ामशाही वंश का आरम्भ जुन्नर में 1490 ई. में अहमद निज़ामशाह (मलिक अहमद) के द्वारा हुआ, जिसने तत्कालीन बहमनी शासक सुल्तान महमूद (1482 से 1518) के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। उसने निज़ामशाह की उपाधि धारण की और उसके द्वारा प्रवर्तित ‘निज़ामशाही वंश’ 1490 से 1637 ई. तक राज्य करता रहा।

साम्राज्य विस्तार

निज़ामशाही सुल्तानों ने 1499 में दौलताबाद के विशाल क़िले पर क़ब्ज़ा कर लिया। इसके पश्चात् 1637 ई. में सम्राट शाहजहाँ के राज्यकाल में उसे जीतकर मुग़ल साम्राज्य में मिला लिया गया। 1574 ई. में इस वंश ने बरार पर भी अधिकार कर लिया था, परन्तु 1596 ई. में उसे बरार को मुग़ल सम्राट अकबर को दे देना पड़ा।


इस वंश के तृतीय शासक हुसेनशाह ने विजयनगर राज्य के विरुद्ध दक्षिण के मुसलमान राज्यों के गठबंधन में भाग लिया था और 1565 ई. के तालीकोट के युद्ध में विजय प्राप्त करने के उपरान्त विजयनगर के लूटने में भी पूरा हाथ बँटाया। चाँदबीबी, जो मुग़लों के विरुद्ध अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध हुई, निज़ामशाही वंश के सुल्तान हुसैन निज़ामशाह प्रथम (1553 से 1565 ई.) की पुत्री थी। निज़ामशाही वंश का आधुनिक काल में अवशिष्ट स्मारक ‘भद्रमहल’ है, जो सफ़ेद पत्थरों से निर्मित है और अपनी जीर्णदशा में अहमदनगर में विद्यमान है।

शासकों के नाम
अहमद निज़ामशाह (1490 – 1506 ई.)
बुरहान निज़ामशाह प्रथम (1510 – 1553 ई.)
हुसैन निज़ामशाह प्रथम (1553 – 1565 ई.)
मुर्तज़ा निज़ामशाह प्रथम (1565 – 1583 ई.)
हुसैन निज़ामशाह द्वितीय (1583 – 1589 ई.)
इस्माइल निज़ामशाह (1589 – 1591 ई.)
बुरहान निज़ामशाह द्वितीय (1591 – 1595 ई.)
इब्राहिम निज़ामशाह (1595 – 1609 ई.)
मुर्तज़ा निज़ामशाह द्वितीय (1609 – 1630 ई.)
बुरहान निज़ामशाह तृतीय (1630 – 1632 ई.)
हुसैन निज़ामशाह तृतीय (1632 – 1636 ई.)


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